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Friday, 23 August 2013

यूं अक्सर बीत रहा ज़िंदगी का सफर















@ 2013 बस यादें सिर्फ यादें ...............
यूं अक्सर बीत रहा ज़िंदगी का सफर
बचपन मे बड़े होने का खवाब,
और फिर बुढापे की नज़र हम पर,
यूं अक्सर बीत रहा ज़िंदगी का सफर
स्कूल से कॉलेज जाने की आरजू मे,
और फिर सुनने को बेताब नौकरी की खबर,
यूं अक्सर बीत रहा ज़िंदगी का सफर
कभी तमन्ना थी सागर को निहारने की पास से,
और फिर बेबस हो जाती ज़िंदगी बन के सागर की लहर,
यूं अक्सर बीत रहा ज़िंदगी का सफर
कभी दिन गुजते थे गाओं से निकलने की कश्मोकश मैं
और फिर हमे अपनी झूठी रोशनी मैं बाँध देता ये शहर,
यूं अक्सर बीत रहा ज़िंदगी का सफर......................
::::::::::::नितीश श्रीवास्तव :::::::::::::

Thursday, 22 August 2013

वो बचपन के दिन बहुत याद आये

















@ 2013 बस यादें सिर्फ यादें ...............
वो बचपन के दिन बहुत याद आये,
वो कडी घूप में जाकर,
मैदानो में खेलना,
जो दिल में है,
वो हर एक बात का कहना,
पापा के ना पढने पर,
वो डाँट का सहना,
दोस्तो के घर की गलियो में,
वो सारी सारी रात का रहना,
रोके कभी ना रूकते,
ये पल जो बीत जाये,
वो बचपन के दिन बहुत याद आये,
आज सोचता हूँ,
तो मुस्कुरा जाता हूँ,
दोस्तो के साथ वो कट्टी बट्टी के खेल को,
याद करते रह जाता हूँ,
आज गिले शिकवे को दिल में पालता हूँ,
चाह कर भी मेरे यार से बात करके,
दिल साफ ना रख पाता हूँ,
भाई बहन के साथ छोटी छोटी बातो पे लडना झगडना,
क्रिकेट में आउट होते ही बैट लेकर सीघा घर को चलना,
आज भी देखता हूँ,
बच्चो को साथ मे खेलते झगडते हुये,
सोचता हूँ खवाहिश आखिर हमे ही क्यो है,
इस दुनिया के मेले मे इतने अकेले हुये,
काश वो बचपन के दिन मै फिर से जी जाऊँ,
इस मसरूफियत की दुनिया में वापस ना आऊँ,
ये वो यादे है,
जो दिल से कभी ना मिट पाये,
वो बचपन के दिन बहुत याद आये,
आज के दौर में हमे कुछ भी मिल जाये,
हम खुश नही होते,
दुनियादारी और जमींदारी के झमेलो मे है,
हम अपने आप को है खोते,
पहले फुरसत की नींद थी,
आज खुली आखो से भी है हम सोते,
कभी तो दिल ही दिल मे है हम रोते..............
::::::::::::नितीश श्रीवास्तव :::::::::::::

कुछ पल जिन्दगी के होते है कितने अच्छे

















@ 2013 बस यादें सिर्फ यादें ...............
कुछ पल जिन्दगी के होते है कितने अच्छे,
मुलायम और मासूम से,
कभी हम अन्जाने ही मुड जाते उन राहो पर,
निहारने उन लम्हो को,
जो सजे थे प्यार से,
नहीं जानता क्या यादो का रंग है सुनहरा,
पर यादो से मेरा रिस्ता है मीठा गहरा,
आसमान से लेकर नीलाई,
और इन्द्रघनुष से सारे रंग,
किनारो से चुराकर लाली,
और श्वेत फूलो के संग,
चाहता हूँ उन लम्हो का एक चित्र बनाना,
चाहता हूँ उन लम्हो में फिर से जीना,
चाहता हूँ यादो के रंग में आज फिर रंग जाना.................
::::::::::::नितीश श्रीवास्तव :::::::::::::

जब याद का किस्सा खोलूँ तो


















@ 2013 बस यादें सिर्फ यादें ...............
जब याद का किस्सा खोलूँ तो,
कुछ लोग बहुत याद आते है,
मैं गुजरे पल को सोचूँ तो,
कुछ लोग बहुत याद आते है,
अब जाने कौन सी नगरी में,
आबाद है जाकर मुद्धत से,
मैं देर रात तक जागूँ तो,
कुछ लोग बहुत याद आते है,
कुछ बातें थी फूलो जैसी,
कुछ लहजे थे खुशबु जैसे,
मैं सारे चमन मे टहलूँ तो,
कुछ लोग बहुत याद आते है,
वो पल भर की नाराजगियाँ,
और मान भी जाना पल भर में,
अब खुद से भी रूठूँ तो,
कुछ लोग बहुत याद आते है...................
::::::::::::नितीश श्रीवास्तव :::::::::::::

खमोशी के पन्नो पर बचपन की याद लिख दे


















@ 2013 बस यादें सिर्फ यादें ...............
खमोशी के पन्नो पर बचपन की याद लिख दे,
इन अनसुनी राहो पर आज कोई फरियाद लिख दे,
वो कोमल सी निष्पाप हँसी,
वो खिलखिलाता सा मन,
ना जाने इन यादो में,
कैसे खो गया बचपन,
पलट के देख वही महका समाँ है,
यादो की करवटो में झुमता जहान है,
बचपन की डोर ने जाने कितने रिश्ते है बांघे,
प्यार से मासूम गांठे है बांघी,
आजाद था मन आजाद थे हम,
दुखः, पीडा, ईष्या, द्वेष कहाँ जाने थे हम,
दोस्तो की बाते दिल की नजदीकियाँ बन जाती थी,
क्या थे वो दिन बस यूही गुजर गये,
गुमनाम इन राहो मे,
जाने हम कब बदल गये,
यादो का संचार है,
जिन पर हमे अभिमान है,
इन यादो को आज मेरा सलाम है,
जिन यादो मे डूबता ये जहान है.....................
::::::::::::नितीश श्रीवास्तव :::::::::::::

अनमोल तेरा जीवन
















@ 2013 बस यादें सिर्फ यादें ...............
अनमोल तेरा जीवन,
यूही गवाँ रहा है,
किस ओर तेरी मजिल,
किस ओर जा रहा है,
सपनो की नींद मे ही,
यह रात ढल ना जाये,
पल भर का क्या भरोसा,
कहीं जान निकल ना जाये,
गिनती की है ये साँसे,
यूँही लुटा रहा है,
ममता के बन्घनो ने,
क्यों आज तुझको घेरा,
सुख मे सभी है साथी,
कोई नहीं है तेरा,
तेरा ही मोह तुझको,
कब से रूला रहा है,
जब तक है भेद मन में,
भगवान से जुदा है,
खोलो जो दिल का दर्पण,
इस घर में ही खुदा है,
सुख रूप हो के भी तू,
दुख आज पा रहा है,
जायेगा जब यहाँ से,
कोई ना साथ देगा,
इस हाथ जो लिया है,
उस हाथ जा के देगा,
कर्मो की है ये खेती,
फल आज पा रहा है,
अनमोल तेरा जीवन,
यूही गवाँ रहा है..........
::::::::::::नितीश श्रीवास्तव :::::::::::::

जीवन बिताया सारा















@ 2013 बस यादें सिर्फ यादें ...............
जीवन बिताया सारा,
इन्तजार करते करते,
रह रहकर मेरे दिल मे,
उठी है ये तरगें,
है दिल मे मेरे केवल,
तेरे मिलने कि उमंग,
कभी आ भी जाँऊ परमात्मा,
यूही राह चलते चलते,
देखो मै ना समझ हूँ,
पकडा है तेरा दामन,
कहाँ जाये अब छोडकर,
मेरे भगवन,
ना साथ छोड देना,
मेरा साथ चलते चलते,
मुझे हर दिन हरपल,
घनश्याम याद आना,
मै भूलने ना पाँऊ,
तुम भी ना भूल जाना,
हे केशव माघव मघुसुदन.................
::::::::::::नितीश श्रीवास्तव :::::::::::::

बस लुटाटा रहा हूँ लिया कुछ नहीं
















@ 2013 बस यादें सिर्फ यादें ...............
बस लुटाटा रहा हूँ लिया कुछ नहीं,
आप कहते है मैने किया कुछ नहीं,
कि प्यार की बात होने से क्या फायदा,
और अब मुलाकात होने से क्या फायदा,
और टूट के जब घरा आज बंजर हुई,
तब ये बरसात होने से क्या फायदा,
कैसे मानू की सब कुछ है संसार में,
मैने ढूढा बहुत पर मिला कुछ नहीं,
कि रूप है इस सिरे प्रेम है उस सिरे,
और कोई सपनो कि गलियो मे कब तक फिरे,
और मन के आकाश मे दुख के बादल घिरे,
ओ सिर्फ कागज पे दो बूँद आँसू गिरे,
चाहता है मुझे तो समझ जायेगा,
मैने खत मे तो वैसे लिखा कुछ नहीं,
कि तेरे हक मे नहीं फैसला है तो क्या,
गम मिला है तो क्या दिल जला है तो क्या,
अब तो चुपचाप ही सिर्फ रहता हूँ मै,
आपसे ही यही बात कहता हूँ मै,
हाले दिल भी बताना नही ठीक है,
कोई पूछे तो कहदो हुआ कुछ नहीं,
कि रात कुछ इस तरह से बिताता हूँ मै,
नींद लगती है तो जाग जाता हूँ मै,
और सिर्फ तुमको ही हरदम सुनाता हूँ मै,
और बंद होठो से जब गीत गाता हूँ मै,
मैने तुमसे तो वैसे बहुत कुछ कहा,
ये अलग है कि तुमने सुना कुछ नहीं,
बस लुटाटा रहा हूँ लिया कुछ नहीं.................
::::::::::::नितीश श्रीवास्तव :::::::::::::

जिन्दगी फूलो की महक
















@ 2013 बस यादें सिर्फ यादें ...............
जिन्दगी फूलो की महक,
काँटो की चुभन का एहसास है जिन्दगी,
मंजिलो को पाने की खुशी,
मुशकिलो से लडने का विशवास है जिन्दगी,
सदैव चलते रहने का हौसला,
अपनो का आर्शीवाद है जिन्दगी,
दर्द सहने की शक्ति,
मौत को हराने का चमत्कार है जिन्दगी,
सादगी सा बचपन
इठलाता लडकपन,
जवानी में दुल्हन का श्रृंगार है जिन्दगी,
कभी दूर कभी पास,
कही घूप कही छाँव का आभास है जिन्दगी.................
::::::::::::नितीश श्रीवास्तव :::::::::::::

Wednesday, 21 August 2013

चाहे जिन्दगी कल किसी भी मोड पे ले जाये















@ 2013 बस यादें सिर्फ यादें ...............
चाहे जिन्दगी कल किसी भी मोड पे ले जाये,
लेकिन ये दोस्त हमेशा याद आयेगें,
चाहे कल कितनी भी खुशी मिल जाये,
लेकिन वो पल हमेशा रूलायेगें,
वो यारो का मिलना,
वो मिल के झगडना,
वो साथ में खाना,
वो रेस लगाना,
वो सीटियाँ मारना,
फिर जल्दी से भागना,
वो कपडो की अदला बदली,
वो रात भर भटकना,
वो एक गाडी पर चार का लटकना,
वो सिगरेट के छल्ले,
वो कैन्टीन के हल्ले,
वो टीचर्स की क्लास लेना,
वो कमीनो की सेना,
शायद हम वो दिन फिर कभी नही जी पायेगें,
वो पल हमें बहुत रूलायेगें..................

चाहे जिन्दगी कल किसी भी मोड पे ले जाये,
लेकिन ये दोस्त हमेशा याद आयेगें,
चाहे कल कितनी भी खुशी मिल जाये,
लेकिन वो पल हमेशा रूलायेगें,
वो यारो का मिलना,
वो मिल के झगडना,
वो साथ में खाना,
वो रेस लगाना,
वो सीटियाँ मारना,
फिर जल्दी से भागना,
वो कपडो की अदला बदली,
वो रात भर भटकना,
वो एक गाडी पर चार का लटकना,
वो सिगरेट के छल्ले,
वो कैन्टीन के हल्ले,
वो टीचर्स की क्लास लेना,
वो कमीनो की सेना,
शायद हम वो दिन फिर कभी नही जी पायेगें,
वो पल हमें बहुत रूलायेगें..................
::::::::::::नितीश श्रीवास्तव :::::::::::::

जिनसे हम छूट गये
















@ 2009 बस यादें सिर्फ यादें ...................
जिनसे हम छूट गये,
अब वो जहान कैसे है,
शाख ए गुल कैसे है,
खुशबु के मकान कैसे है,
ऐ सबा तू तो उघर से ही गुजरती होगी,
उस गली में मेरे पैरो के निशाँ कैसे है,
पत्थरो वाले वो इन्सान,
वो बेहिस दर ओ बाम,
वो मकीं कैसे है,
शीशे के मकान कैसे है,
कहीं शबनम के शिगूफे,
कहीं अंगारो के फूल,
आके देखो मेरी यादो के जहान कैसे है,
ले के घर से जो निकलते थे जुनून की मशाल,
इस जमाने मे वो साहिब ए नजराँ कैसे है,
याद उनकी हमे जीने न देगी राही,
दुश्मन ए जान वो मसीहा नफ्साँ कैसे है..................
::::::::::::नितीश श्रीवास्तव :::::::::::::

मौत जिन्दगी से कितनी बेहतर है















@ 2013 बस यादें सिर्फ यादें ...............
मौत जिन्दगी से कितनी बेहतर है,
जिन्दा थे तो किसी ने पास बिठाया नहीं,
अब खुद मेरे चारो ओर बैठे जा रहे है,
पहले कभी किसी ने मेरा हाल ना पूछा,
अब सभी आंसू बहाये जा रहे है,
एक रूमाल भी भेंट नही किया जब हम जिन्दा थे,
अब शॉले और कपडे ओढाये जा रहे है,
सबको पता है शॉले और कपडे इसके काम के नहीं है,
मगर फिर भी बेचारे दुनियादारी निभाये जा रहे है,
कभी किसी ने एक वक्त का खाना तक नही खिलाया,
अब देसी घी मेरे मुँह मे डाले जा रहे है,
जिन्दगी मे एक कदम भी ना साथ चल सका कोई,
अब फूलो से सजाकर कन्घो पर उठाये जा रहे है....................
::::::::::::नितीश श्रीवास्तव :::::::::::::

माँ का आँचल
















@ 2013 बस यादें सिर्फ यादें ...............
माँ का आँचल,
पितह की गोद,
जिसमे बिता था बचपन मेरा रोज,
दादी की कहानी थी,
जिसमे परियाँ और रानी थी,
बाबा की हथेली से,
उनकी ऐनक भी चुरानी थी,
ना थी दिन रात की फिकर,
ना सुख दुख की कहानी थी,
दिन खेल कूद मे बीत देना,
रात को माँ के हाथो से मार खा के नींद आ जानी थी,
ना थी कोई चिन्ता,
ना फिकर थी आगे की,
बस ऐसा था बचपन मेरा,
और ऐसी ही मेरी जिन्दगानी थी,
अब ना वो दिन ना वो रावानी थी,
बस एक कहानी बनकर रह गया सब,
जिसमे मेरी जावानी थी....................
::::::::::::नितीश श्रीवास्तव :::::::::::::

दिल के उजले कागज पर हम कैसे गीत लिखे

















@ 2013 बस यादें सिर्फ यादें ...............
दिल के उजले कागज पर हम कैसे गीत लिखे,
बोलो तुमको गैर लिखे या अपना मीत लिखे,
नीले अम्बर की अगनाई मे तारो के फूल,
मेरे प्यासे होठो पर है अंगारो के फूल,
इन फूलो को आखिर अपनी हार या जीत लिखे,
कोई पुराना सपना दे दो और कुछ मीठे बोल,
लेकर हम निकले है अपनी आखो के कश खोल,
हम बंजारे प्रीत के मारे क्या संगीत लिखे,
शाम खडी है एक चमेली के प्याले मे शबनम,
जमुना जी की उंगली पकडे खेल रहा है मघुबन,
ऐसे में गंगा जल से राघा कि प्रीत लिखे......................
 
::::::::::::नितीश श्रीवास्तव :::::::::::::

दहेज अमीरो की शान
















@ 2013 बस यादें सिर्फ यादें ...............
दहेज अमीरो की शान,
गरीबो के लिये शाप बन जाता है,
लाख बचा ले दामन,
कहाँ गरीब इससे बच पाता है,
रोते बिलखते है,
जिनकी बेटियो को शिकार बनाता है,
बनके लाइलाज बिमारी,
समाज को खाता है,
ना हो पूरी तो बहुओ को निशाना बनाता है,
ता उम्र ना पापियो दहेज काम चलाता है,
क्यूँ अब कापा मन तेरा,
अब क्यूँ तन तेरा थराता है,
देख लम्बे होते दहेज के हाथ,
छोड दिया जमाने ने बेटियो के हाथ,
शायद इसीलिये जन्म से पहले ही मरवाता है,
पहले कहाँ घबराता था इतना,
जितना अब बेटियो से घबराता है...........
::::::::::::नितीश श्रीवास्तव :::::::::::::

जजबाते समंदर था















@ 2013 बस यादें सिर्फ यादें ...............
जजबाते समंदर था,
या दौलते उफान है,
आखिरी सफर में उठा,
जो रिशतो का तुफान है,
दावेदारो की कतार पे,
आनन्द मुस्कुरा रहा,
लगे शायद जहान वालो को,
मायने समझा रहा,
यू ही चले आये थे,
यू ही चले जाना है,
ये जमीं नही किसी की,
दुनिया मुसाफिर खाना है,
कल था आर्शीवाद मेरा,
कल और का हो जाना है,
सूरत लेकर आये थे,
सीरत लेकर जाना है...........
::::::::::::नितीश श्रीवास्तव :::::::::::::

बुझ गयी तपते हुये दिन की अगन,















@ 2013 बस यादें सिर्फ यादें ...............
बुझ गयी तपते हुये दिन की अगन,
साँझ ने चुपचाप ही पी ली जलन,
रात झुक आयी पहन उजला वसन,
प्राण तुम क्यो मौन हो कुछ गुनगुनाओ,
चाँदनी के फूल तुम मुस्कुराओ,
इक नीली झील सा फैला आँचल,
आज ये आकाश है कितना सजल,
चाँद जैसे रूप का उभरा कवल,
रात भर इस रूप का जादू जगाओ,
प्राण तुम क्यो मौन हो कुछ गुनगुनाओ........................
::::::::::::नितीश श्रीवास्तव :::::::::::::