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Tuesday, 4 April 2017

पुरानी जीन्स और गिटार

@2012 बस यादेँ सिर्फ यादेँ...............

पुरानी जीन्स और गिटार,
मोहल्ले की वो छत और मेरे यार,
वो रातों को जागना,
सुबह घर जाना कूद के दीवार,
वो सिगरेट पीना गली में जाके,
वो करना दांतों को घड़ी घड़ी साफ़,
पहुंचना कॉलेज हमेशा लेट,
वो कहना सर का "Get out from the class "
वो बाहर जाके हमेशा कहना,
यहाँ का सिस्टम ही है ख़राब,
वो जाके कैंटीन में टेबल बजाके,
वो गाने गाना यारों के साथ,
बस यादें, यादें, यादें रह जाती हैं,
छोटी, छोटी, बातें रह जातीं हैं,
वो पापा का डांटना,
वो कहना मम्मी का छोड़ें जी आप,
तुम्हें तो बस नज़र आता है,
जहाँ में बेटा मेरा ही ख़राब,
वो दिल में सोचना कर के कुछ दिखा दें,
वो करना प्लैनिंग रोज़ नयी यार,
लड़कपन का वो पहला प्यार,
वो लिखना हाथों पे N + R,
वो खिड़की से झांकना,
वो लिखना लेटर उन्हें बार बार,
वो देना तोहफे में सोने की बालियां,
वो लेना दोस्तों से पैसे उधार,
ऐसा यादों का मौसम चला,
भूलता ही नहीं दिल मेरा,
कहाँ मेरी जीन्स और गिटार
मोहल्ले की वो छत और मेरे यार,
बस यादें, यादें, यादें रह जाती हैं,
छोटी, छोटी, बातें रह जातीं हैं............

**** नितिश श्रीवास्तव ****

2 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल गुरूवार (06-04-2017) को

    "सबसे दुखी किसान" (चर्चा अंक-2615)
    पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    विक्रमी सम्वत् 2074 की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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