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Tuesday, 4 April 2017

जमाने से अकेले क्यूँ लडा












































@ 2012 बस यादेँ सिर्फ यादेँ............

जमाने से अकेले कयूँ लडा हूँ सोचना होगा,
जमाना है खफ़ा या मै खफ़ा हूँ सोचना होगा,
तुम्हारे कद से मेरा कद अगर मिलता नही यारों,
तुम्हारे साथ फिर कयूँ मै खड़ा हूँ सोचना होगा,
मेरी आवाज दुनिया तक पहुंचती कयूँ नहीं या रब,
ये मै किस मजलूम की आखिर सदा हूँ सोचना होगा,
नजर आता है जो भी वो चुराता है नज़र अपनी,
ये मैं इनसान हूँ के आइना हूँ सोचना होगा,
मेरी चाहत मे हर कोई यहाँ बीमार लगता हैं,
तो मैं किस मरज़ की आखिर दवा हूँ सोचना होगा......

**** नितिश श्रीवास्तव ****

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